महोबा। संत कबीर अमृतवाणी सत्संग कार्यक्रम का शुभारम्भ कबीर आश्रम कठकलवापुरा महोबा मे प्रत्येक रविवार की भॉति प्रात: 8 बजे से 10 बजे तक कबीर वन्दना जय कबीर जय कबीर जय गुरू कबीरा। दास तोरे द्वार खड़े उनकी हरो पीरा से शुरू हुआ। सत्संग मे कंछेदीलाल पुरवार पं0 हरीशंकर नायक, सुखराम स्नेही, पूजा सैन, जगदीश चन्द्र रिछारिया, गयाप्रसाद राठौर, संगीत शिक्षक त्रिलोक, रामदीन अनुरागी, राजकुमार अनुरागी ने सामूहिक स्वर मे भजन उमरिया धोखे मे खोय दियो, तूने कबहुँ न कृष्ण कहो, सुनाया। सुखराम स्नेही का गाया भजन तेरे द्वार खड़ा भगवान भगत भर दे रे झोली खूब सराहा गया। वरिष्ठ कवि हरिश्चन्द्र वर्मा और लखनलाल चौरसिया ने रूढ़िवादिता समाप्त करने के उद्देश्य से कबीर पर रचनॉए प्रस्तुत की। प्रवक्ता कामता प्रसाद चौरसिया ने कहा कि कथा, कीर्तन व सत्संग मनुष्य को भवसागर से पार कराने में सहायक है। वीरभूमि डिग्री कालेज के प्रोफेसर डॉ0एल0सी0 अनुरागी ने कहा कि सद्गुरू के नाम के बिना संसार तीन प्रकार के तापों- दैविक, आध्यात्मिक और भौतिक तापो से तप रहा है। दैविक और भौतिक ताप तो औषधि के सेवन से मिट जाते है परंतु आत्म ताप से मनुष्य भीतर ही भीतर जलता रहता है। इसलिए सदगुरू की शरण मे भक्ति करना चाहिए तभी सभी ताप मिटेगे। डॉ० अनुरागी ने जिन ढढा तिन पाइयाँ गहरे पानी पैहि। जो वीरा बन डरा, रहा किनारे बैहि की विस्तार से व्याख्या की
सद्गुरू की शरण मे जाने से दैविक, आध्यात्मिक व भौतिक तापमत र डा राणा